शुक्रवार 25 सितंबर 2026 - 19:07
संयुक्त राष्ट्र में ईरानी राष्ट्रपति का साहसिक रुख; ‘हम आतंकवादी नहीं, बल्कि आतंकवाद के शिकार हैं’: मौलाना सय्यद वसी हैदर रिज़वी

कर्नाटक के करीमपुर के इमामे जुमा हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना सैयद वसी हैदर रिज़वी ने संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान के साहसिक रुख की सराहना करते हुए कहा कि ‘हम आतंकवादी नहीं, बल्कि आतंकवाद के शिकार हैं’ का जवाब ईरान के खिलाफ लगाए गए आरोपों की वास्तविकता को स्पष्ट करता है। उन्होंने मिनाब के एक स्कूल में शहीद हुए मासूम बच्चों की तस्वीरें वैश्विक मंच पर पेश किए जाने को सराहनीय बताया।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक के करीमपुर स्थित मस्जिदे अस्करी में नमाज़े जुमा के खुत्बे को संबोधित करते हुए हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना सय्यद वसी हैदर रिज़वी ने तक़वा, सच्चाई, ईमानदारी, अच्छे अख़लाक, ज्ञान और विद्वानों के सम्मान तथा मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पिज़िशकियान के हालिया भाषण को विशेष रूप से रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने वैश्विक मंच पर ईरान के खिलाफ लगाए जाने वाले आरोपों का साहस के साथ जवाब दिया और ईरान में अमेरिकी और ज़ायोनी हमलों के परिणामस्वरूप शहीद हुए मासूम बच्चों की तस्वीरें पूरी दुनिया के सामने पेश कीं।

‘हम आतंकवादी नहीं, बल्कि आतंकवाद के शिकार हैं’

मौलाना सय्यद वसी हैदर रिज़वी ने कहा कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पिज़िशकियान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा ईरान को आतंकवादी बताए जाने वाले रुख के जवाब में स्पष्ट शब्दों में कहा कि ‘हम आतंकवादी नहीं, बल्कि आतंकवाद के शिकार हैं; हमने केवल अपना बचाव किया है।’

उन्होंने कहा कि पिज़िशकियान ने वैश्विक समुदाय के सामने साहस के साथ यह सवाल उठाया कि जिन लोगों और ताकतों ने ईरान के खिलाफ हमले किए, वे ही ईरान को आतंकवादी बताने की कोशिश कैसे कर सकते हैं। ईरानी राष्ट्रपति ने अपने भाषण में ईरान पर हुए हमलों, नागरिकों की मौत और गैर-सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने का उल्लेख करते हुए वैश्विक समुदाय का ध्यान मानवीय त्रासदी की ओर आकर्षित किया।

करीमपुर के इमामे जुमा ने कहा कि पिज़िशकियान के भाषण का एक महत्वपूर्ण और दर्दनाक पहलू यह था कि उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक मंच पर मिनाब के एक स्कूल में शहीद हुए मासूम बच्चों की तस्वीरें अपने हाथों में उठाकर दुनिया के सामने पेश कीं। इस अवसर पर उन्होंने इन बच्चों को निर्दोष बताते हुए ईरान पर हुए हमलों के मानवीय परिणामों को वैश्विक समुदाय के सामने रखा।

मौलाना ने कहा कि मिनाब के स्कूल पर हमले में लगभग 168 मासूम छात्राएं शहीद हुईं। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने भी इस हमले पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की थी।

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक संस्थान के मंच पर ईरान के रुख को इस तरह पेश करना और मासूम शहीद बच्चों की तस्वीरें दुनिया के सामने लाना एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक और मानवीय कदम था। पेज़ेशकियान के भाषण को वैश्विक मीडिया ने भी प्रमुखता से रिपोर्ट किया, जिसमें उनके ‘ईरान आतंकवादी नहीं, बल्कि आतंकवाद का शिकार है’ वाले रुख और मिनाब के बच्चों की तस्वीरें पेश करने को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।

मौलाना ने कहा कि मासूम बच्चों की शहादत और नागरिक आबादी को निशाना बनाया जाना पूरी मानवता के लिए चिंता का विषय है। वैश्विक समुदाय को ताकत और युद्ध के बजाय न्याय, बातचीत, कूटनीति और मानव जीवन की रक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए।

इमाम हसन अस्करी (अ) की शिक्षाएं; तक़वा और अच्छे अख़लाक शिया की पहचान

खुत्बे के एक महत्वपूर्ण हिस्से में हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना सय्यद वसी हैदर रिज़वी ने इमाम हसन अस्करी (अ) की अपने अनुयायियों के लिए प्रसिद्ध वसीयत का उल्लेख करते हुए तक़वा, सच्चाई, ईमानदारी और अच्छे अख़लाक के महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने इमाम हसन अस्करी (अ) के इस कथन का उल्लेख किया: «فَإِنَّ الرَّجُلَ مِنْكُمْ إِذَا وَرِعَ فِي دِينِهِ، وَصَدَقَ فِي حَدِيثِهِ، وَأَدَّى الْأَمَانَةَ، وَحَسَّنَ خُلُقَهُ مَعَ النَّاسِ، قِيلَ: هَذَا شِيعِيٌّ، فَيَسُرُّنِي ذَلِكَ»

उन्होंने कहा कि इमाम हसन अस्करी (अ) ने इस हदीस में शिया की वास्तविक पहचान को उसके चरित्र और व्यावहारिक जीवन से जोड़ा है। तक़वा, सच्चाई, ईमानदारी और अच्छे अख़लाक केवल व्यक्तिगत गुण नहीं हैं, बल्कि अहले बैत (अ) की शिक्षाओं का व्यावहारिक रूप हैं।

मौलाना ने कहा कि हमें अपने कथन और आचरण के माध्यम से अहले बैत (अ) की शिक्षाओं का प्रतिनिधित्व करना चाहिए। इंसान का चरित्र और लोगों के साथ उसका व्यवहार उसकी धार्मिक शिक्षा और ईमान की व्यावहारिक पहचान होता है। इसलिए जरूरी है कि हम समाज में ईमानदारी, सहनशीलता, अच्छे व्यवहार और आपसी सम्मान को बढ़ावा दें।

ज्ञान और विद्वानों का सम्मान

मौलाना सय्यद वसी हैदर रिज़वी ने ज्ञान और विद्वानों के सम्मान पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि धार्मिक ज्ञान इंसान को सही और गलत तथा सत्य और असत्य के बीच अंतर करने की क्षमता प्रदान करता है और उसके चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उन्होंने कहा कि अहले बैत (अ) की शिक्षाओं से जुड़ाव के साथ ज्ञान प्राप्त करना और विद्वानों का सम्मान करना भी हमारी धार्मिक जिम्मेदारी है। नई पीढ़ी की सही धार्मिक शिक्षा और समाज के सुधार के लिए ज्ञान, मारफ़त और विद्वानों के मार्गदर्शन से लाभ उठाना जरूरी है।

आयतुल्लाह शुबैरी ज़ंजानी (र) के निधन पर संवेदना

खुत्बे की शुरुआत में मौलाना सय्यद वसी हैदर रिज़वी ने मरजए आलीक़द्र आयतुल्लाह अज़्मा सय्यद मूसा शुबैरी ज़ंजानी (र) के निधन पर गहरे दुख और शोक व्यक्त करते हुए संवेदना प्रकट की और उनकी मूल्यवान शैक्षिक एवं धार्मिक सेवाओं को श्रद्धांजलि दी।

उन्होंने कहा कि ऐसे महान विद्वानों की शैक्षिक सेवाएं और धार्मिक विरासत धार्मिक शिक्षा केंद्रों तथा नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शन का अनमोल स्रोत हैं।

खुत्बे के अंत में मौलाना सय्यद वसी हैदर रिज़वी ने कहा कि वर्तमान दौर में अहले बैत (अ) की शिक्षाओं को व्यावहारिक जीवन में लागू करने की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। तक़वा, सच्चाई, ईमानदारी, अच्छे अख़लाक, ज्ञान का सम्मान और पीड़ित इंसानों के प्रति सहानुभूति ही वे सिद्धांत हैं, जो एक नेक, सम्मानित और शांतिपूर्ण समाज की नींव प्रदान करते हैं।

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